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من مشكاة النبوة (6) "أين ابن عمك" (خطبة) (باللغة الهندية)

من مشكاة النبوة (6) أين ابن عمك (خطبة) (باللغة الهندية)
حسام بن عبدالعزيز الجبرين

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تاريخ الإضافة: 16/11/2022 ميلادي - 22/4/1444 هجري

الزيارات: 4693

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शीर्षक:

पैगंबरी कंदील(6)

तुम्हारे चचेरे भाई कहाँ गए

अनुवादक:

फैज़ुर रह़मान ह़िफज़र रह़मान तैमी

 

प्रथम उपदेश:

प्रशंसाओं के पश्चात

मैं आप को और स्वयं को अल्लाह का तक़्वा (धर्मनिष्ठा) अपनाने और आत्मा एवं शैतान से जिहाद करने की वसीयत करता हूं ताकि आप ईमान व इह़सान के स्थान तक पहुँच सकें:

﴿ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُواْ فِي هَذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌ وَلَدَارُ الآخِرَةِ خَيْرٌ وَلَنِعْمَ دَارُ الْمُتَّقِينَ ﴾ [النحل: 30].

अर्थात: उनके लिये जिन्होंने इस लोक में सदाचार किये बड़ी भलाई है,और वास्तव में परलोक का घर (स्वर्ग) अति उत्तम है,और आज्ञाकारियों का आवास कितना अच्छा है


रह़मान के बंदो पैगंबर की जीवनी के घटनाओं से आत्मा की खश्की दूर होती है,ईमान में वृद्धि होता है और मुस्लिम बंदा की अंतर्दृष्टिमें आलोक आता है।आइये सुगंधित नबवी जीवनी के एक घटने पर विचार करते हैं,फिर उससे कुछ लाभ निकालते हैं:

ह़ज़रत सहल बिन सअ़द रज़ीअल्लाहु अंहु से वर्णित है,उन्होंने फरमाया:अल्लाह के रसूल सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ह़ज़रत फातिमा रज़ीअल्लाहु अंहा के घर आए तो ह़ज़रत अ़ली रज़ीअल्लाहु अंहु को घर में नहीं पा कर उनसे पूछा: तुम्हारे चचेरे भाई कहाँ गए उन्होंने हमारे बीच झगड़ा हो गया था,वह मुझ से अप्रसन्न हो कर कहीं बाहर चले गए हैं,उन्होंने मेरे यहाँ क़ैलूला नहीं किया (यहाँ नहीं सोए) अल्लाह के रसूल सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक व्यक्ति से फरमाया: देखो वह कहाँ हैं वह देख कर आया और कहने लगा:अल्लाह के रसूल वह मस्जिद में सो रहे हैं।(यह सुन कर) आप मस्जिद गए जहाँ ह़ज़रत अ़ली रज़ीअल्लाहु अंहु लेटे हुए थे।उनके एक पहलू से चादर हटने के कारण वहाँ मिट्टी लग गई थी।अल्लाह के रसूल सलल्लाहु अलैहि वसल्लम उनके शरीर से मिट्ट साफ करते हुए फरमाने लगे: अबूतोराब उठो अबूतोराब उठो । (बोख़ारी व मुस्लिम)


प्रथम लाभ: नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी पुत्री से उनके ससुराल में जाके उनसे मोलाकात किया,आप केवल अपने पिता होने तक सीमित नहीं रहे कि आपका दर्शन किया जाता,बल्कि स्वयं ही अपनी पुत्री के घर उनको मिलने गए,इसी प्रकार से आपकी पुत्री भी आपके घर आपको मिलने आया करती और आप सलल्लाहु अलैहि वसल्लम और संसार भर की महिलाओं की सरदार (फातिमा) के बीच पैत्रिकअनुराग का दृश्य देखने को मिलता।


द्वतीय लाभ: फातिमा रज़ीअल्लाहु अंहा उत्तम संसकार और उच्च रूचिवाली थीं,अत: जब उन्होंने अपने और अपने पति के झगड़े का उल्लेख किया तो नम्र शैलीएवं संक्षिप्तविवेचनअपनाई: हमारे बीच झगड़ा हो गया था और मुझसे नाराज़ हो कर वह कहीं बाहर चले गए (केवल एतना ही कहा) और विस्तारसे विवरण करने से बचीं और गलती का बोझ किसी एक पर न थोपी,बल्कि (आपसी झगड़े को) दोनों का संयुक्तमामला बताया हमारे बीच झगड़ा हो गया था ।


ए मेरे मित्रो पत्नी जब प्रत्येक छोटे बड़े मामले में अपनी ज़बान बेलगाम कर देती है,तो वह अपनी विशेषता खो देती है,अपनी कठिनाइयों का सीमा बढ़ा देती है,एक छोटे से मामले के विभिन्न पहलूाओं पर नियंत्रण करने की क्षमता नहीं रख पाती।


तृतीय लाभ: नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने संक्षिप्त सूचना पर बस किया और विवरण जानने से बचे,अत: आप ने फातिमा से यह नहीं पूछा कि तुम दोनों के बीच क्या हुआ और न उनको विस्तृत मामला बयान करने पर मजबूर किया,बल्कि उन समस्त विवरणों से बचते हुए उनके पति की खोज में लग गए जो नाराज़ हो कर बाहर चले गए


विवाहित जीवन में आने वाले कठिनाइयों से (नीति के साथ) निपटना और उनके विवरण में जाने से बचना,उन्हें मामूली कठिनाई में परिवर्तित कर देता है।


चौथा लाभ: नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने दामाद के साथ पैत्रिकअनुराग का व्यवहार किया जिससे उन्हें यह लगा कि नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम पति-पत्नीदोनों के लिये है,अत: नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम उनके पास आते हैं,वह सो रहे होते हैं,आप अपने पवित्र हाथ से उनके पहलू पर लगे मिट्टी झाड़ते हैं और प्यार से फरमाते हैं:अबू तोराब उठो।अबू तोरब उठो।इस अनुकंपा शैलीसे आत्मा में प्रेम एवं अनुराग पैदा हुआ,आपने उन्हें ऐसी उपनामसे पुकारा जो उनकी वर्तमानरूपकीअभिव्यक्तिथी,आपने उन्हें डांटा नहीं कि वह आपकी पुत्री से नाराज़ हो कर क्यों निकल आए,जबकि आपके के लिए फातिमा का स्थान अति अधिक उच्च था।


अल्लाह तआ़ला मुझे और आपको क़ुरान व सुन्नत से लाभ पहुंचाए,उनमें जो आयतें और नितियों की बातें हैं,उन्हें हमारे लिए लाभदायक बनाए,आप अल्लाह से क्षमा मांगें,नि:संदेह वह अति क्षमाशील है।


द्वतीय उपदेश

प्रशंसाओं के पश्चात:

पूर्व के घटने से एक लाभ यह भी मिलता है कि अ़ली रज़ीअल्लाहु अंहु ने वैवाहिक कठिनाइयों से निपटने में नीति से काम लिया,वह भी ऐसी कठिनाइयां जिनमें क्रोध का तत्व पाया जाता हो,अत: उनका घर से निकल कर मस्जिद में क़ैलूला करनाबातचीत को बढ़ाने,झगड़ा को आगे बढ़ाने,भावनाओं को भड़कने से रोकने में सहायक सिद्ध हुआ,परिणामस्वरूप क्रोध ठंडा हो गया और दिलों में स्वभाविक प्रेम एवं अनुराग लौट आया।


छटा लाभ: इस घटने से रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम की नज़र में अ़ली रज़ीअल्लाहु अंहु के महत्व एवं सम्मान का पता चलता है,वह इस प्रकार से कि आपने उनके प्रति पूछा,फिर चल कर उनके पास गए और उनके पहलू से धूल झाड़ा,उनको उपनामसे पुकारा और उन्हें डांटा नहीं।


सातवां लाभ: इस प्रेम एवं अनुराग और नम्री का प्रभाव अ़ली रज़ीअल्लाहु अंहु के दिल में ताज़ा रहा और वह इसे याद करके हमेशा प्रसन्न होते रहे,अत: समस्त नामों में उनको सबसे अधिक अबूतोराब ही पसंद था,सहल बिन सअ़द रज़ीअल्लाहु अंहु फरमाते हैं: ह़ज़रत अ़ली रज़ीअल्लाहु अंहु को कोई नाम अबूतोराब से अधिक पसंद नहीं था,जब उन्हें अबूतोराब कहा जाता तो बहुत प्रसन्न होते थे ।

إن الصلاةَ على النبيِ هدايةٌ

فلتتخذ منها لدينك سُلَّما

ترقى بها عند الإله فردِّدوا

صلى الإله على النبي وسلَّما


अर्थात: नबी सलल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरूद भेजना हिदायत का कार्य है,तुम्हें इस हिदायत को सीढ़ी के रूप में अपना लेना चाहिए।


ताकि इसके द्वारा अल्लाह के निकट उच्च स्थान तक पहुँच सको,अत: बार-बार दुहराओ और कहो:अल्लाह तआ़ला नबी पर दरूद व सलाम भेजे

 





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