• الصفحة الرئيسيةخريطة الموقعRSS
  • الصفحة الرئيسية
  • سجل الزوار
  • وثيقة الموقع
  • اتصل بنا
English Alukah شبكة الألوكة شبكة إسلامية وفكرية وثقافية شاملة تحت إشراف الدكتور سعد بن عبد الله الحميد
الدكتور سعد بن عبد الله الحميد  إشراف  الدكتور خالد بن عبد الرحمن الجريسي
  • الصفحة الرئيسية
  • موقع آفاق الشريعة
  • موقع ثقافة ومعرفة
  • موقع مجتمع وإصلاح
  • موقع حضارة الكلمة
  • موقع الاستشارات
  • موقع المسلمون في العالم
  • موقع المواقع الشخصية
  • موقع مكتبة الألوكة
  • موقع المكتبة الناطقة
  • موقع الإصدارات والمسابقات
  • موقع المترجمات
 كل الأقسام | الثقافة الإعلامية   التاريخ والتراجم   فكر   إدارة واقتصاد   طب وعلوم ومعلوماتية   عالم الكتب   ثقافة عامة وأرشيف   تقارير وحوارات   روافد   من ثمرات المواقع  
اضغط على زر آخر الإضافات لغلق أو فتح النافذة اضغط على زر آخر الإضافات لغلق أو فتح النافذة
  •  
    مفهوم الإنسانية الحقة، في ميزان الله والخلق
    د. نبيل جلهوم
  •  
    الحبة السوداء شفاء من كل داء
    د. عبدالعزيز بن سعد الدغيثر
  •  
    علي بن أبي طالب أبو الحسنين
    د. محمد بن علي بن جميل المطري
  •  
    العلاج بأبوال الإبل في السنة النبوية
    د. عبدالعزيز بن سعد الدغيثر
  •  
    قراءات اقتصادية (62) كتب غيرت العالم
    د. زيد بن محمد الرماني
  •  
    المزيد في شرح كتاب التوحيد لخالد بن عبدالله
    محمود ثروت أبو الفضل
  •  
    وسائل صناعة الكراهية بين الثقافات: الاستشراق ...
    أ. د. علي بن إبراهيم النملة
  •  
    من مائدة الصحابة: أبو عبيدة بن الجراح رضي الله
    عبدالرحمن عبدالله الشريف
  •  
    قراءات اقتصادية (61): اليهود والعالم والمال
    د. زيد بن محمد الرماني
  •  
    العلم والتقنية؛ أية علاقة؟
    لوكيلي عبدالحليم
  •  
    دروس من حياة ابن عباس (رضي الله عنهما)
    د. حسام العيسوي سنيد
  •  
    حلق رأس المولود حماية ووقاية في السنة النبوية
    د. عبدالعزيز بن سعد الدغيثر
  •  
    هديه - صلى الله عليه وسلم - في التداوي بسور
    الشيخ أ. د. عرفة بن طنطاوي
  •  
    من وسائل صناعة الكراهية بين الثقافات: الاستشراق ...
    أ. د. علي بن إبراهيم النملة
  •  
    ألفية لسان العرب في علوم الأدب لزين الدين شعبان ...
    محمود ثروت أبو الفضل
  •  
    وسائل صناعة الكراهية بين الثقافات: الاستشراق ...
    أ. د. علي بن إبراهيم النملة
شبكة الألوكة / آفاق الشريعة / منبر الجمعة / الخطب / العبادات / الصلاة وما يتعلق بها
علامة باركود

فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون (خطبة) (باللغة الهندية)

فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون (خطبة) (باللغة الهندية)
حسام بن عبدالعزيز الجبرين

مقالات متعلقة

تاريخ الإضافة: 28/4/2022 ميلادي - 27/9/1443 هجري

الزيارات: 7250

 حفظ بصيغة PDFنسخة ملائمة للطباعة أرسل إلى صديق تعليقات الزوارأضف تعليقكمتابعة التعليقات
النص الكامل  تكبير الخط الحجم الأصلي تصغير الخط
شارك وانشر

अल्‍लाह की उपकारोंको याद करो ताकि तुम सफल रहो


प्रशंसाओं के पश्‍चात:र्स्‍वश्रेष्‍ठ बात अल्‍लाह की बात है,और र्स्‍वोत्‍तम मार्ग मोह़म्‍मद का मार्ग है,दुष्‍टतम चीज़ धर्म में अविष्‍कार की गई बिदअ़त (नवाचार) है और प्रत्‍येक नवाचार गुमराही है।


ऐ ईमानी भाइयो अल्‍लाह का एक ऐसा आदेश जिसका अल्‍लाह ने बार-बार उल्‍लेख किया है,जिस को याद रखने से गम एवं उदासी का बोझ हलका हो जाता है,एक ऐसी चीज़ जिसे याद करना स्‍वयं प्रर्थना है,त‍था उस पर विचार करने से बंदा के अंदर आज्ञाकारिता का भाव व रूची एवं पाप से घृणा पैदा होता है किन्‍तु हम इसके प्रति आलसा करते हैं,इस लिए कि स्‍मरण के सभाओं से हमारा संबंध कम है,विभिन्‍न प्रकारें के अवसरों,अनेक कार्यरतताओं एवं कामों से हमें अधिक लगाव है।


इसका आश्‍य उपकारोंको याद करना है अल्‍लाह तआ़ला ने हूद अलैहिस्‍सलमम के ज़बान से फरमाया:

﴿ فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ﴾ [الأعراف: 69]

 

अर्थात:तथा अल्‍लाह के पुरस्‍कारों को याद करो संभवत: तुम सफल हो जाओगे।


तथा दूसरे स्‍थान पर अल्‍लाह ने सा‍लेह़ अलैहिस्‍सलाम के ज़बीना फरमाया:

﴿  فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ ﴾ [الأعراف: 74]

अर्थात:अत: अल्‍लाह के उपकारों को याद करो और धरती में उपद्रव करते न फिरो।


तथा सूरह رحمن के अंदर 31 आयतों में यह दुहराया गया है:

﴿ فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴾ [الرحمن: 73]

अर्थात:तो तुम अपने पालनहार के किन-किन उपकारों को झुठलाओगे


आइये हम अल्‍लाह की कुछ उपकारोंको याद करते हैं,क्‍योंकि इन्‍हें याद करना भी प्रार्थना है,सौभाग्‍य एवं तक्‍़वा व आज्ञाकारिता का मार्ग एवं वसीला (माध्‍यम) है।


एक व्‍यक्ति यूनुस बिन ओ़बैद के पास आया और अपनी दरिद्रता की शिकायत करने लगा,यूनुस ने उससे कहा: क्‍या तुम इससे प्रसन्‍न होगे कि तुम्‍हें इस आंख के बदले जिससे तुम देखते हो,एक लाख दिरहम दिए जाएं उसने कहा:नहीं,यूनुस ने कहा:तुम अपने हाथों के बदले एक लाख दिरहम लेकर प्रसन्‍न हो जाओग उसने कहा:नहीं,यूनुस ने कहा:अपने पांव के बदले उसने कहा:नहीं,वर्णनकर्ता का बयान है:यूनुस उस व्‍यक्ति को अल्‍लाह की उपकारेंयाद दिलाते रहे और अंत में कहा:तुम्‍हारे पास लाखों दिरहम हैं और तुम दरिद्रता की शिकायत कर रहे हो


वहब बिन मोनब्बिह फरमाते हैं: आले दाउूद की नीतियों में लिखा हुआ है: स्‍वास्‍थ्‍य,छुपा हुआ साम्राज्‍य है ।


रह़मान के बंदो यदि तुम्‍हें कोई ग़म पहुंचे और तुम्‍हारा दिल तंग हो जाए तो अल्‍लाह की उपकारोंको याद करो,तम्‍हें अपने खुले सीने और सौभाग्‍य का भाव होगा


मैं एक मुसलमान हूं,सुनने,देखने,चलने,बोलने,सूंघन,सोचने,पढ़ने,लिखन के योग्‍य हूं,अहले सुन्‍नत व अलजमाअ़त में से हूं,मैं चिन्हित माता-पिता का पुत्र हूं,मेरे भाई और बहनें हैं,सारे परिजन,मित्र,पत्‍नी,संतान,हिदायत एवं मार्ग दर्शन,व्‍यवसाय,स्‍वास्‍थ्‍य एवं शान्ति,गाड़ी व सवारी,शांति,खाना-‍पीना,बिजली,संतुष्टि,नीति व समझ,अस्‍पताल और इलाज और इनके अतिरिक्‍त भी अनेक उपकारेंहैं (जिन से लाभान्वित हो रहा हूं)...और सबसे बड़ी उपकार अल्‍लाह पर ईमान लाना है।


रह़मान के बंदो हस्‍पतालों में कितने ऐसे रोगी हैं जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के जैसा स्‍वास्‍थ्‍य के इच्‍छुक हैं जेलों में कितने ही ऐसे क़ैदी हैं जो आप की स्‍वतंत्रा के जैसा स्‍वतंत्रा का इच्‍छा रखते हैं आश्रयगृह में कितने ऐसे शरणा‍र्थी हैं जो आपके कोमल एवं सुखदायी बिस्‍तर का सपनादेख रहे हैं,कब्रों में कितने ऐसे दफन हैं जो आप के जीवन का समय चाहते हैं कितने ऐसे अशिक्षित हैं जो आप के जैसा पढ़ने लिखने का इच्‍छा रखते हैं,अशिक्षा के कारण उनके ज्ञान का दायरा सीमित है ज्ञान का शोध उनके लिए एक कठिन कार्य है


रह़मान के बंदो यह कितनी बड़ी प्रार्थना होगी कि आप हमेशा उन उपकारोंको याद रखें जो अल्‍लाह ने आप पर धर्म,स्‍वास्‍थ्‍य,शरीर और आप के आस पास किए हैं कुछ पूर्वजों का कहना है: नेमत को याद करने से अल्‍लाह तआ़ला का प्रेम पैदा होता है ।ह़सन रहि़महुल्‍लाह फरमाते हैं: इन उपकारोंको अधिक से अधिक याद करो क्‍योंकि इन्‍हें याद करना अल्‍लाह का आभार व्‍यक्‍त करना है ।


अल्‍लाह तआ़ला मुझे और आप को क़ुर्रान की बरकत से लाभान्वित फरमाए....


द्वतीय उपदेश

प्रशंसाओं के पश्‍चात!


ऐ ईमानी भाइयो!वर्तमान समय में जो नेमतें पाई जाती हैं,उनमें उद्योग एवं वाणिज्‍य के समस्‍त रूप भी शामिल हैं,मैं आप को उन में से केवल कुछ को याद दिला रहा हूं,आप अपने जीवन को उनसे हटा कर देखें तो आप को बहुत कठिनाई होगी!


गाड़ी, सड़कें, क्रॉसलाइट, घड़ी, एसी, बल्‍ब, एटीएम, कम्‍पूटर, फैक्‍स


मशीन, टेलीफोन, मोबाइल,मोबाइल में प्रयोग होन वाले विभिन्‍न ए‍प्लिकेशन, टेलीवीजन, इंटरनेट, चिकित्‍सा उपकरण,माइक्रोफोन,वॉशिंग मशीन,बायलर,बिजली का स्‍टोव,फ्रीज,वाटर कूलर,मिश्रण मशीन,वाटर बॉयलर,ट्रक,क्रेन,हवाई जहाज,इस्‍टीमर,खिड़की एवं इसक विभिन्‍न उपकरण,बरतन और इसके विभिन्‍न प्रकार,वस्‍त्र और इसके अनेक प्रकार और इस प्रकार एक लंबी सूची है!


वर्तमान काल में जो नई नेमतें पाई जाती हैं उन में यह भी शामिल है कि चिकित्‍सा,शोध,इलाज और (दर्द) दूर करने वाली दवाओं के विभाग में अधिक उन्‍नति हुई है,अल्‍लाह का फरमाना है:

 

﴿ وَسَخَّرَ لَكُمْ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مِنْهُ إِنَّ فِي ذَلِكَ لَآيَاتٍ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ ﴾ [الجاثية: 13]

अर्थात:तथा उस ने तुम्‍हारी सेवा में लगा रखा है जो कुछ आकाशों तथा धरती में है सब को अपनी ओर से,वास्‍तव में इस में बहुत सी निशानियाँ हैं उन के लिये जो सोच-विचार करें।


इन सबसे बड़ी नेमत यह है कि (हमें) इस्‍लाम की नेमत प्राप्‍त हुई,जब कि संसार की बहुसंख्‍या काफिर है आप अल्‍लाह की प्रशंसा करें कि उसने आप को केवल अपनी पूजा की तौफीक़ प्रदान की जिस को कोई साझी नहीं:

﴿ فَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ حَلَالًا طَيِّبًا وَاشْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ إِنْ كُنْتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ ﴾ [النحل: 114]

अर्थात:अत: उस में से खाओ जो अल्‍लाह ने तुम्‍हें हलाल (वैध) स्‍वच्‍छ जीविका प्रदान की है,और अल्‍लाह का उपकार मानो यदि तुम उसी का वंदना करते हो।


दरूद व सलाम पढ़ें...

صلى الله عليه وسلم

 





 حفظ بصيغة PDFنسخة ملائمة للطباعة أرسل إلى صديق تعليقات الزوارأضف تعليقكمتابعة التعليقات
شارك وانشر

مقالات ذات صلة

  • خطبة: يحب لأخيه ما يحب لنفسه (باللغة الهندية)
  • الله الرفيق (خطبة) (باللغة الهندية)
  • إن الله يحب التوابين (خطبة) (باللغة الهندية)
  • ضرورة طلب الهداية من الله (باللغة الهندية)
  • الله الكريم الأكرم (خطبة) (باللغة الهندية)
  • من عمل صالحا فلنفسه (باللغة الهندية)
  • فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون (خطبة) - باللغة الإندونيسية
  • فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون (خطبة) - باللغة النيبالية
  • فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون (خطبة) - باللغة البنغالية

مختارات من الشبكة

  • {فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون} (باللغة الأردية)(مقالة - آفاق الشريعة)
  • فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون (خطبة)(مقالة - آفاق الشريعة)
  • فاذكروا آلاء الله لعلكم تفلحون(مقالة - ثقافة ومعرفة)
  • إذا ذكرت الله في ملأ ذكرك الله في ملأ خير منه(مقالة - آفاق الشريعة)
  • ذكر الله سبب من أسباب ذكر الله لك في الملأ الأعلى(مقالة - آفاق الشريعة)
  • ذكر الله حياة القلوب(مقالة - آفاق الشريعة)
  • فتنة تطاول الزمن.. قوم نوح عليه السلام نموذج(مقالة - آفاق الشريعة)
  • ذكر الله سبب من أسباب نزول السكينة(مقالة - آفاق الشريعة)
  • ذكر الله سبب من أسباب صلاة الله عليك(مقالة - آفاق الشريعة)
  • سلسلة تذكير الأمة بشرح حديث: "كل أمتي يدخلون الجنة" الجزء التاسع(مقالة - آفاق الشريعة)

 



أضف تعليقك:
الاسم  
البريد الإلكتروني (لن يتم عرضه للزوار)
الدولة
عنوان التعليق
نص التعليق

رجاء، اكتب كلمة : تعليق في المربع التالي

مرحباً بالضيف
الألوكة تقترب منك أكثر!
سجل الآن في شبكة الألوكة للتمتع بخدمات مميزة.
*

*

نسيت كلمة المرور؟
 
تعرّف أكثر على مزايا العضوية وتذكر أن جميع خدماتنا المميزة مجانية! سجل الآن.
شارك معنا
في نشر مشاركتك
في نشر الألوكة
سجل بريدك
  • بنر
  • بنر
كُتَّاب الألوكة
  • طلاب مدينة مونتانا يتنافسون في مسابقة المعارف الإسلامية
  • النسخة العاشرة من المعرض الإسلامي الثقافي السنوي بمقاطعة كيري الأيرلندية
  • مدارس إسلامية جديدة في وندسور لمواكبة زيادة أعداد الطلاب المسلمين
  • 51 خريجا ينالون شهاداتهم من المدرسة الإسلامية الأقدم في تتارستان
  • بعد ست سنوات من البناء.. افتتاح مسجد أوبليتشاني في توميسلافغراد
  • مدينة نازران تستضيف المسابقة الدولية الثانية للقرآن الكريم في إنغوشيا
  • الشعر والمقالات محاور مسابقة "المسجد في حياتي 2025" في بلغاريا
  • كوبريس تستعد لافتتاح مسجد رافنو بعد 85 عاما من الانتظار

  • بنر
  • بنر

تابعونا على
 
حقوق النشر محفوظة © 1447هـ / 2025م لموقع الألوكة
آخر تحديث للشبكة بتاريخ : 6/3/1447هـ - الساعة: 9:3
أضف محرك بحث الألوكة إلى متصفح الويب